वास्तु पुरुष मंडल
आपकी ज़मीन पर लेटी एक दिव्य आकृति, और वह जाल जो इस आकृति को काम के नक्शे में बदल देता है, ताकि उस पर रखकर फ़्लोर प्लान पढ़ा जा सके।

वास्तु पुरुष को समझें
वास्तु पुरुष वह दिव्य पुरुष हैं जिनमें वास्तु के सारे सिद्धांत समाए हैं। कल्पना कीजिए कि आपकी ज़मीन पर एक मानव आकृति लेटी है, जिसका सिर उत्तर-पूर्व की ओर और पैर दक्षिण-पश्चिम की ओर हैं, और शरीर का हर अंग किसी अलग ज़ोन से जुड़ा है।
इसे शब्दशः न लें। यह एक नक्शा है। वास्तु पुरुष बताते हैं कि आपके घर में ब्रह्मांड की ऊर्जा कैसे बँटी हुई है, और शरीर के अलग-अलग अंग ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं।
64 पदों का मंडल
वास्तु का बुनियादी जाल आपकी ज़मीन को 64 चौकोर हिस्सों (8×8) में बाँटता है। हर हिस्सा एक "पद" है, और हर पद के अपने गुण और अपने स्वामी देवता होते हैं।
बारीकी से जाँच चाहिए तो 64 पदों वाली पद्धति अपनाएँ। यह सटीक है और हर ज़ोन के लिए अलग उपाय बताती है। मान लीजिए आपका प्रवेश द्वार किसी प्रतिकूल पद में पड़ता है, तो आप ठीक-ठीक समस्या पहचानकर उसे सुधार सकते हैं। पूरा ब्योरा पद और देवता में है।
81 पदों का मंडल
81 पदों वाली पद्धति (9×9 जाल) और बारीकी देती है। इसमें हर पद का अपना अलग स्वामी ग्रह होता है, इसलिए यह 64 वाली पद्धति से ज़्यादा विस्तार में जाती है।
गहरी जाँच चाहिए, या आपकी ज़मीन बड़ी है या नक्शा पेचीदा है, तो इसे अपनाएँ। फ़्लैट और छोटे घरों के लिए आम तौर पर 64 पदों वाली पद्धति ही काफ़ी रहती है।
ब्रह्मस्थान: आपके घर का दिल
ब्रह्मस्थान घर का बीच वाला हिस्सा है, आपके घर का दिल और उसकी चेतना। 64 पदों के जाल में यह बीच के 4 पद हैं, और 81 पदों के जाल में बीच के 9 पद।
ब्रह्मस्थान को खुला रखें। यहाँ रसोई के उपकरण, भारी फ़र्नीचर या खंभे न रखें, क्योंकि ऊर्जा यहीं इकट्ठा होकर पूरे घर में बँटती है। ब्रह्मस्थान सामान से भरा हो, तो बाकी सारे ज़ोन तक ऊर्जा का बहाव रुक जाता है।
मंडल पद्धति कैसे काम करती है
मंडल एक औज़ार है, नियमों की किताब नहीं। इसकी मदद से आप:
- पता लगाते हैं कि आपका प्रवेश द्वार किस पद में है
- पता लगाते हैं कि आपका बेडरूम, रसोई और बाकी कमरे किन पदों में हैं
- समझते हैं कि ये जगहें आपकी ज़िंदगी का साथ देती हैं या नहीं
- किसी जगह से असंतुलन हो, तो उसके लिए ठोस उपाय पाते हैं
हर घर मंडल में पूरी तरह फ़िट नहीं बैठता। फ़्लैट, L-आकार के घर और बेढब नक्शों में थोड़ा लचीलापन रखना पड़ता है; जाल का हूबहू मेल बैठाने से ज़्यादा ज़रूरी सिद्धांतों को समझना है।