फ़्लैट, घर और प्लॉट का वास्तु
वास्तु के नियम हर तरह की प्रॉपर्टी पर लागू होते हैं — बस हर एक में देखने की बातें थोड़ी अलग होती हैं।

प्लॉट का वास्तु
ज़मीन का प्लॉट देखते समय इन बातों पर ध्यान दें:
- आकार — चौकोर और आयताकार प्लॉट आदर्श हैं। तिकोने, टेढ़े-मेढ़े या बहुत लंबे-पतले प्लॉट से बचें; अजीब आकार हो तो उपाय भी उलझ जाते हैं।
- ढलान — दक्षिण या नैऋत्य कोण की ओर हल्की ढलान अच्छी है, इससे पानी ठीक से निकल जाता है। उत्तर या पूर्व की ओर ढलान से बचें, इससे अच्छी ऊर्जा बह जाती है।
- सामने की सड़क — ईशान कोण से आती सड़क आदर्श है। दक्षिण या नैऋत्य कोण से आने वाली सड़क से बचें।
- पानी के स्रोत — उत्तर या ईशान में हों तो शुभ, दक्षिण या नैऋत्य में हों तो चुनौती भरे। चारों ओर पानी से घिरा प्लॉट न लें।
- पेड़ — उत्तर या पूर्व में हों तो बढ़त लाते हैं। दक्षिण या नैऋत्य में बड़े पेड़ हों तो ठीक नहीं, वे ऊर्जा रोकते हैं।
फ़्लैट का वास्तु
फ़्लैट में मुश्किल यह है कि हर बार आदर्श दिशाओं के हिसाब से चलना मुमकिन नहीं होता। इसलिए इन नियमों को अपने घर के हिसाब से ढालें:
- प्रवेश द्वार — अगर द्वार आदर्श दिशा में नहीं है, तो उपायों से उसे सक्रिय करें: दीया, कोई शुभ चिह्न या जल तत्व ऊर्जा बदल सकते हैं।
- ब्रह्मस्थान — घर का बीच वाला हिस्सा खुला रखें; अगर आपके फ़्लैट के बीच में गलियारा या बैठक है, तो उसे खाली रखें।
- कमरे — दिशाएँ पूरी तरह सही न हों, तब भी कमरों को उनके काम के हिसाब से सजाएँ। बेडरूम अंदर की ओर, बैठने-उठने की जगहें दरवाज़े की ओर।
- पड़ोसी — फ़्लैट में रहते हुए पड़ोसियों के साथ ऊर्जा भी साझा होती है। अपनी जगह साफ़-सुथरी और खुशनुमा रखें, ताकि बाहर का बुरा असर कम पड़े।
- बालकनी — इसे घर का एक दरवाज़ा ही समझें। जिस दिशा में बालकनी है, उसके हिसाब से पौधों, रोशनी या शुभ चिह्नों से उसे सक्रिय करें।
मकान का वास्तु
मकान में वास्तु के नियम लागू करने की ज़्यादा आज़ादी मिलती है। प्राथमिकता इस क्रम में रखें:
- प्रवेश द्वार की जगह और उसे सक्रिय करना
- रसोई आग्नेय कोण में
- मास्टर बेडरूम नैऋत्य कोण में
- ब्रह्मस्थान खुला और खाली
- बैठने-उठने की जगहें उत्तर या पूर्व में
- बाथरूम दक्षिण या आग्नेय कोण में
अगर नया घर बना रहे हैं, तो शुरू से ही नक्शा इन नियमों को ध्यान में रखकर बनवाएँ।
ऑफ़िस का वास्तु
ऑफ़िस का वास्तु दिशाओं से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं को मेज़ों, आने-जाने के रास्तों, सामान रखने की जगह और मिलकर काम करने की जगहों पर लागू करता है। यह कारोबार के नतीजों की भविष्यवाणी नहीं करता।
- मुख्य द्वार — आदर्श रूप से ईशान कोण या पूर्व में, नए मौक़ों और तरक्की के लिए।
- रिसेप्शन — उत्तर या पूर्व की ओर, ताकि ग्राहकों और ऊर्जा का स्वागत हो।
- मालिक की मेज़ — नैऋत्य कोने में, मुँह ईशान या पूर्व की ओर, ताकि अधिकार भी बना रहे और दूर तक की सोच भी।
- मीटिंग रूम — पूर्व या उत्तर में, मिल-जुलकर काम करने की ऊर्जा के लिए।
- सर्वर रूम या स्टोर — दक्षिण या नैऋत्य में, ताकि भारी साज़ो-सामान ज़मीन से जुड़ा, स्थिर रहे।
- ब्रेक रूम — उत्तर या ईशान में, ताज़गी और थोड़े आराम के लिए।
- बाथरूम — दक्षिण या आग्नेय कोण में, काम की जगह से दूर।
दुकान का वास्तु
दुकान का पारंपरिक वास्तु आने-जाने के रास्ते, सामान की जगह, रोशनी और दिशाओं से जुड़ी प्रतीकात्मक मान्यताओं को देखता है। यह बिक्री की भविष्यवाणी नहीं करता।
- प्रवेश द्वार — वास्तु की कई परंपराएँ ईशान कोण या पूर्व को अच्छा मानती हैं; ग्राहकों के आने का रास्ता खुला और आसान रखें।
- कैश काउंटर — कुछ परंपराएँ आग्नेय कोण को अग्नि से जोड़ती हैं और भाग-दौड़ वाला काम वहीं रखती हैं।
- स्टोर — वास्तु के कुछ मत भारी माल के लिए दक्षिण या नैऋत्य को पसंद करते हैं।
- डिस्प्ले — ऐसी उजली, रोशन जगह चुनें जहाँ ग्राहक सामान आसानी से देख और छू सकें।
- मालिक के बैठने की जगह — कुछ परंपराएँ नैऋत्य कोण पसंद करती हैं, मुँह ईशान की ओर।
- शुभ चिह्न — रक्षा और समृद्धि के लिए ॐ या स्वस्तिक।