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भाग 6/13वास्तु देवता6 मिनट में पढ़ें
वास्तु देवता

45 वास्तु देवता

वास्तु पुरुष मंडल में घर के हर हिस्से का एक देवता होता है। हर देवता का अपना पारंपरिक स्वभाव है, और इसी से समझ आता है कि वास्तु में घर के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग नज़र से क्यों देखा जाता है।

छोटे-छोटे ज्यामितीय चिह्नों के घेरों से बना एक चौकोर मंडल, जिसका बीच का हिस्सा खाली है
मंडल के बाहरी और भीतरी घेरों में देवताओं को उनकी पारंपरिक भूमिका के हिसाब से बीच के चारों ओर रखा गया है।

45 देवताओं की यह व्यवस्था बीच में बैठे ब्रह्मा के चारों ओर चार परतों में फैली है: भीतर की ओर देव वीथी और मनुष्य वीथी, और सबसे बाहर पैशाच वीथी। इन परतों के हर पद का अपना एक देवता है।

इसे पढ़ने का तरीका सीधा है: पहले ग्रिड पर घर की जगह तय करें, फिर देखें कि कौन-सा पद है और उसका देवता कौन है। उसके बाद उस पद में जो कमरा, दरवाज़ा या खुली जगह है, वही बताती है कि रीडिंग का असल मतलब घर के लिए क्या है।

ब्रह्म वीथी

1. ब्रह्मा घर के ठीक बीच, यानी ब्रह्मस्थान में विराजते हैं। वे सृष्टि, संतुलन, व्यवस्था और घर की मूल जीवन-शक्ति के प्रतीक हैं। पूरा ग्रिड इन्हीं के इर्द-गिर्द बना है, इसलिए वास्तु में यह हिस्सा बहुत ध्यान से देखा जाता है: यह कितना खुला है, यहाँ क्या बना है, कितना वज़न है और इसे किस काम में लिया जा रहा है। अगर यहाँ कोई बड़ी रुकावट या भारी ढाँचा हो, तो इस हिस्से को और बारीकी से जाँचना चाहिए।

देव वीथी

देव वीथी सीधे ब्रह्मा को घेरे हुए है — इसमें चार देवता हैं, जो भीतर की चारों मुख्य दिशाओं के हिस्से संभालते हैं।

#देवतास्थानअर्थ
2भूधरउत्तरथामे रखना और सहारा देना — स्थिरता, मज़बूत नींव, चीज़ों का टिके रहना
3अर्यमापूर्वरिश्ते, आपसी मेल-जोल, व्यवस्था, लंबे समय तक बने रहने वाला जुड़ाव
4विवस्वानदक्षिणसूर्य से जुड़ा — पहचान, सक्रियता, अपनी बात साफ़ कहना
5मित्रपश्चिमदोस्ती, आपसी समझौते, मिल-जुलकर काम, भरोसा

मनुष्य वीथी

इसके बाद की परत — भीतरी हिस्से और बाहरी सीमा के बीच देवताओं के आठ स्थान।

#देवतास्थानअर्थ
6आपःईशान कोण (उत्तर-पूर्व)जल — बहाव, पोषण, नयापन
7आपवत्सईशान कोण (उत्तर-पूर्व)आपः देवता के साथी — घर में साधनों का आना-जाना बनाए रखते हैं
8सावित्रआग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)सूर्य से जुड़ा, जगाने वाला — हलचल और काम की शुरुआत करवाता है
9सविताआग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)सूर्य से जुड़ा, टिकाए रखने वाला — काम को जारी रखना और लगन से मेहनत
10इंद्रनैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)अधिकार, शक्ति, नेतृत्व, बल
11इंद्रजयनैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)इंद्र से जुड़ी जीत — कामयाबी, रुकावटों को पार करना
12रुद्रवायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)बदलाव लाने वाली शक्ति — परिवर्तन, तीव्रता, सुधार
13रुद्रजयवायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)रुद्र का बदलाव और साथ में जीत — बदलकर मुश्किलों से पार पाना

पैशाच वीथी

सबसे बाहरी घेरा — पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में फैले देवताओं के 32 स्थान। बारीकी से जाँच करने में ये खास काम आते हैं, क्योंकि दरवाज़े, खिड़कियाँ, दीवारें और दूसरी खुली जगहें सीधे इन्हीं पर पड़ती हैं।

पूर्व के देवता
#देवताअर्थ
14शिखीआग और लौ — रोशनी, जागृति, तेज़ ऊर्जा
15पर्जन्यवर्षा — पोषण, उपजाऊपन, नयापन, बढ़त
16जयंतजीत और कामयाबी — आगे बढ़ते रहना, रुकावटें पार करना
17महेंद्रइंद्र का ही एक रूप — अधिकार, नेतृत्व, प्रभाव
18सूर्यसूर्य — जीवन-शक्ति, रोशनी, स्पष्टता, पहचान
19सत्यसत्य — ईमानदारी, खरापन, साफ़-सुथरा व्यवहार
20भृशज़ोर और तीव्रता — इरादे को काम में बदलना
21आकाशआकाश तत्व — खुलापन, गुंजाइश, बेरोक-टोक काम करने की जगह
दक्षिण के देवता
#देवताअर्थ
22अनिलहवा और गति, उस दिशा में जो आमतौर पर ठोस ढाँचे से जुड़ी मानी जाती है
23पूषापोषण, रक्षा, राह दिखाना, सहारा देना
24वितथझूठ या भरोसे की कमी — यह पद सावधान करता है और सुधार की ओर इशारा करता है
25गृहक्षतघर की रक्षा — घर-गृहस्थी की व्यवस्था और हिफ़ाज़त
26यमव्यवस्था, अनुशासन, कर्तव्य, मर्यादा, संयम
27गंधर्वसंगीत, कला, सुंदरता, सलीके वाला आनंद
28भृंगराजछाँटना-निखारना, बदलाव, सार निकालना, अलग करना
29मृगहिरण — सतर्कता, संवेदनशीलता, सहज समझ, जिज्ञासा
पश्चिम के देवता
#देवताअर्थ
30पितृपितरों से जुड़ा पहलू — वंश, विरासत, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती परंपरा
31दौवारिकद्वारपाल — रक्षा, सोच-समझकर आने-जाने देना, सीमाओं की चौकसी
32सुग्रीवताकत, वफ़ादारी, मिल-जुलकर काम, संगठित सहारा
33पुष्पदंतफूल — सुंदरता, नफ़ासत, आकर्षण, मन को भाने वाले गुण
34वरुणपश्चिम के प्रमुख देवता — जल, सृष्टि का नियम, संतुलन बनाए रखना
35असुरज़ोर, इच्छा, महत्वाकांक्षा, भौतिक चीज़ों की तीव्र चाह
36शोषसूखना, खाली होते जाना, धीरे-धीरे घटना
37पापयक्ष्माकमज़ोरी और खालीपन — यह पद सावधान रहने को कहता है
उत्तर के देवता
#देवताअर्थ
38रोगरोग — यह पद ध्यान देने को कहता है, यह कोई भविष्यवाणी नहीं है
39नागनाग देवता — धरती, रक्षा, उपजाऊपन, रखवाली
40मुख्यमुखिया, प्रधान — नेतृत्व, दिशा, ज़िम्मेदारी
41भल्लाटताकत, साधन, भौतिक सहारा, स्थिरता
42सोमचंद्रमा — पोषण, शांति, नई ताज़गी, समृद्धि
43भुजगनाग — भीतर ही भीतर रक्षा और धरती से जुड़ी स्थिरता
44अदितिविशालता, खुलापन, आज़ादी, विस्तार, माँ जैसा भाव
45दितिशक्ति, भौतिक ज़ोर, महत्वाकांक्षा, विस्तार
अपनी रिपोर्ट में देवताओं को कैसे पढ़ें — सबसे पहले सही उत्तर दिशा तय करें, फिर चुने हुए मंडल के हिसाब से घर को पदों में बाँटें, और उसके बाद देखें कि बात किस पद की है और उसका देवता कौन है। दिशा मोटे तौर पर इलाका बताती है, पद ठीक-ठीक जगह बताता है, और देवता उस जगह की पारंपरिक पहचान बताते हैं। आख़िर में यह देखें कि उस जगह का इस्तेमाल किस काम के लिए हो रहा है, इसी से पूरी तस्वीर साफ़ होती है।